राजस्थान राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के प्रारूप का अध्ययन करने और सिफारिशें तैयार करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा गठित समिति।
भारतीय संविधान के भाग 4 में राज्य की नीति निर्देशक तत्व (Directive principles of state policy) वर्णित है। भाग 4 के अनुच्छेद 44 में यह प्रावधान है कि
"नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता – राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।"
इस संबंध में कानून का प्रारूप (Draft) तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश। कानूनी क्षेत्र में व्यापक और दीर्घकालिक अनुभव के साथ, वह समिति की नीतिगत और विधिक गतिविधियों का मार्ग निर्देशन कर रही हैं।
सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी। प्रशासनिक कार्यवाहियों, नीतियों के क्रियान्वयन और नौकरशाही के समन्वय में इनका गहन अनुभव समिति के शोध कार्यों को गति प्रदान करता है।
राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर के अतिरिक्त महाधिवक्ता। विधिक मामलों, स्थानीय न्यायिक प्रथाओं और नागरिक संहिताओं के कानूनी प्रारूप के परीक्षण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
राजकीय विधि महाविद्यालय, श्रीगंगानगर के सेवानिवृत्त प्राचार्य। शैक्षणिक अनुसंधान, कानूनी अवधारणाओं और विधि के छात्रों व समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने के क्षेत्र में इनका दशकों का अनुभव है।
शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में प्रतिष्ठित विशेषज्ञ। समिति में महिला अधिकारों, लैंगिक न्याय और समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित नीतिगत सुझावों के विश्लेषण में इनका अमूल्य योगदान है।
राजस्थान सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव। समिति के प्रशासनिक समन्वय, आधिकारिक सूचनाओं के प्रसारण और गृह विभाग के माध्यम से परामर्श प्रक्रिया के सुचारू संचालन का जिम्मा संभालते हैं।